श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 220
 
 
श्लोक  2.8.220 
ক্ষণে ক্ষণে সর্ব অঙ্গ হয স্তম্ভাকৃতি
তিলার্ধেক নোঙাইতে নাহিক শকতি
क्षणे क्षणे सर्व अङ्ग हय स्तम्भाकृति
तिलार्धेक नोङाइते नाहिक शकति
 
 
अनुवाद
कभी-कभी तो उनका पूरा शरीर इस प्रकार अकड़ जाता था कि कोई भी उनके शरीर को थोड़ा सा भी मोड़ नहीं सकता था।
 
Sometimes his entire body would become so stiff that no one could bend his body even a little.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)