श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 219
 
 
श्लोक  2.8.219 
যাহা নাহি দেখি শুনি শ্রী-ভাগবতে
হেন সব বিকার প্রকাশে শচী-সুতে
याहा नाहि देखि शुनि श्री-भागवते
हेन सब विकार प्रकाशे शची-सुते
 
 
अनुवाद
शचीपुत्र ने परमानंद प्रेम के कई अद्भुत रूपांतरण प्रकट किये, जो श्रीमद्भागवत में न तो मिलते हैं और न ही सुने जाते हैं।
 
Sachiputra manifested many wonderful manifestations of ecstatic love, which are neither found nor heard in the Srimad Bhagavatam.
तात्पर्य
उन्माद प्रेम के रूपांतर श्रीमद् भागवत में भी नहीं अंकित हैं वे प्रत्यक्ष श्री गौरासुन्दर के दिव्यविग्रह में अवतरित होकर परिपूर्ण हुए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)