श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 217
 
 
श्लोक  2.8.217 
অদ্বৈতের ভক্তি দেখিঽ সবার তরাস
নিত্যানন্দ-গদাধর—দুই-জনে হাস
अद्वैतेर भक्ति देखिऽ सबार तरास
नित्यानन्द-गदाधर—दुइ-जने हास
 
 
अनुवाद
अद्वैत आचार्य की भक्तिमय सेवा देखकर सभी लोग भयभीत हो गए, परन्तु नित्यानन्द और गदाधर केवल हँस पड़े।
 
Seeing Advaita Acharya's devotional service, everyone was frightened, but Nityananda and Gadadhara only laughed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)