श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 216
 
 
श्लोक  2.8.216 
আপাদ-মস্তক তৃণে নিছিযা লৈযানিজ
শিরে থুইঽ নাচে ভ্রুকুটি করিযা
आपाद-मस्तक तृणे निछिया लैयानिज
शिरे थुइऽ नाचे भ्रुकुटि करिया
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपना पूरा शरीर घास से ढक लिया और कुछ घास अपने सिर पर रख ली, तथा नाचते समय उनकी भौंहें तन गईं।
 
He covered his entire body with grass and placed some on his head, and his eyebrows were raised as he danced.
तात्पर्य
शब्द निकिया का मतलब होता है, "ढक कर"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)