श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 214
 
 
श्लोक  2.8.214 
দাস্য-ভাবে নাচে প্রভু শ্রী-গৌরসুন্দর
চৌদিগে কীর্তন-ধ্বনি অতি মনোহর
दास्य-भावे नाचे प्रभु श्री-गौरसुन्दर
चौदिगे कीर्तन-ध्वनि अति मनोहर
 
 
अनुवाद
भगवान श्री गौरसुन्दर सेवक भाव से नृत्य कर रहे थे, तथा कीर्तन की मनमोहक ध्वनि चारों दिशाओं में गूंज रही थी।
 
Lord Shri Gauranga Sundara was dancing with a spirit of devotion, and the melodious sound of kirtan was echoing in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)