श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 209
 
 
श्लोक  2.8.209 
সে বা কেনে ভাগবত পডে বা পডায
ভক্তির প্রভাব নাহি যাহার জিহ্বায
से वा केने भागवत पडे वा पडाय
भक्तिर प्रभाव नाहि याहार जिह्वाय
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति भक्ति की महिमा का वर्णन नहीं करता, वह श्रीमद्भागवत का पाठ या उपदेश क्यों करता है?
 
Why does a person who does not describe the glory of devotion recite or preach Shrimad Bhagwat?
तात्पर्य
जिन्हें भक्ति के सौंदर्य का कोई ज्ञान नहीं है और जो गर्व से स्वामी बनने की इच्छा से श्रीमद् भागवतम का पाठ करते हैं, उनका पाठ निरर्थक है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)