श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 199
 
 
श्लोक  2.8.199 
কলি-যুগ প্রশṁসিল শ্রী-ভাগবতে
এই অভিপ্রায তাঽর জানিঽ ব্যাস-সুতে
कलि-युग प्रशꣳसिल श्री-भागवते
एइ अभिप्राय ताऽर जानिऽ व्यास-सुते
 
 
अनुवाद
व्यासपुत्र भगवान के इरादे को जानते थे, इसलिए उन्होंने श्रीमद्भागवत में कलियुग का महिमामंडन किया।
 
Vyasaputra knew the intention of the Lord, so he glorified Kaliyuga in Srimad Bhagavatam.
तात्पर्य
श्री व्यास के पुत्र श्री शुकदेव जी अच्छी तरह जानते थे कि श्री गौरासुंदर कलियुग में अवतरित होंगे, इसलिए उन्होंने श्रीमद् भागवतम (11.5.36 और 12.3.51) में कलियुग का महिमामंडन इस प्रकार किया:

कलिं सभा जयन्त्यार्य

गुण ज्ञाह् सारभागिनः

यत्र संकीर्तनेनैव

सर्वस्वार्थोभिलभ्यते

"जो वास्तव में ज्ञान में उन्नत हैं वे कलियुग के आवश्यक मूल्य की सराहना करने में सक्षम हैं। ऐसे प्रबुद्ध व्यक्ति कलियुग की पूजा करते हैं क्योंकि इस पतित युग में जीवन की सभी पूर्णता संकीर्तन के प्रदर्शन द्वारा आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

कलर् दोषनिधे राजन्

अस्ति ह्य एको महान् गुणः

कीर्नाद एव कृष्णस्य

मुक्तसंङ्गः परं व्रजेत्

"मेरे प्रिय राजन, यद्यपि कलयुग दोषों का सागर है, फिर भी इस युग के बारे में एक अच्छी बात है: केवल हरि कृष्ण महामंत्र का जाप करने से, व्यक्ति भौतिक बंधन से मुक्त हो सकता है और उसे पारलौकिक साम्राज्य में पदोन्नत किया जा सकता है।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)