कलिं सभा जयन्त्यार्य
गुण ज्ञाह् सारभागिनः
यत्र संकीर्तनेनैव
सर्वस्वार्थोभिलभ्यते
"जो वास्तव में ज्ञान में उन्नत हैं वे कलियुग के आवश्यक मूल्य की सराहना करने में सक्षम हैं। ऐसे प्रबुद्ध व्यक्ति कलियुग की पूजा करते हैं क्योंकि इस पतित युग में जीवन की सभी पूर्णता संकीर्तन के प्रदर्शन द्वारा आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
कलर् दोषनिधे राजन्
अस्ति ह्य एको महान् गुणः
कीर्नाद एव कृष्णस्य
मुक्तसंङ्गः परं व्रजेत्
"मेरे प्रिय राजन, यद्यपि कलयुग दोषों का सागर है, फिर भी इस युग के बारे में एक अच्छी बात है: केवल हरि कृष्ण महामंत्र का जाप करने से, व्यक्ति भौतिक बंधन से मुक्त हो सकता है और उसे पारलौकिक साम्राज्य में पदोन्नत किया जा सकता है।"
