श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 192
 
 
श्लोक  2.8.192 
চতুর্দিগে শ্রী-হরি-মঙ্গল-সঙ্কীর্তন
মাঝে নাচে জগন্নাথ-মিশ্রের নন্দন
चतुर्दिगे श्री-हरि-मङ्गल-सङ्कीर्तन
माझे नाचे जगन्नाथ-मिश्रेर नन्दन
 
 
अनुवाद
जगन्नाथ मिश्र के पुत्र भगवान हरि के पवित्र नामों के मंगलमय सामूहिक कीर्तन के बीच नृत्य कर रहे थे, जिससे चारों दिशाएं गूंज रही थीं।
 
The sons of Jagannatha Mishra were dancing amidst the auspicious group chanting of the holy names of Lord Hari, which was resonating in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)