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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन
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श्लोक 185
श्लोक
2.8.185
পূর্বে যে বৈষ্ণব দেখিঽ ধরযে চরণ
তার বক্ষে উঠিঽ করে চরণ অর্পণ
पूर्वे ये वैष्णव देखिऽ धरये चरण
तार वक्षे उठिऽ करे चरण अर्पण
अनुवाद
पहले जब भी भगवान किसी वैष्णव को देखते थे तो उसके चरण पकड़ लेते थे, किन्तु अब वे उनकी छाती पर चढ़ जाते थे और अपने चरण उन्हें समर्पित कर देते थे।
Earlier, whenever the Lord saw a Vaishnava, he would hold his feet, but now he would climb on his chest and offer his feet to him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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