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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन
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श्लोक 183
श्लोक
2.8.183
অলৌকিক হঞা প্রভু বৈষ্ণব-আবেশে
যে বলিতে যোগ্য নহে, তাও প্রভু ভাষে
अलौकिक हञा प्रभु वैष्णव-आवेशे
ये बलिते योग्य नहे, ताओ प्रभु भाषे
अनुवाद
इस प्रकार भगवान वैष्णव की दिव्य भावना में लीन हो गए और ऐसे शब्द बोले जो उनके लिए उपयुक्त नहीं थे।
Thus the Lord became absorbed in the transcendental spirit of Vaishnava and spoke words that were not appropriate for Him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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