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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन
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श्लोक 182
श्लोक
2.8.182
গৌর-বর্ণ দেহ—ক্ষণে নানা-বর্ণ দেখি
ক্ষণে ক্ষণে দুই গুণ হয দুই আঙ্খি
गौर-वर्ण देह—क्षणे नाना-वर्ण देखि
क्षणे क्षणे दुइ गुण हय दुइ आङ्खि
अनुवाद
यद्यपि भगवान का रंग स्वर्णिम था, फिर भी वे कभी-कभी विभिन्न रंगों में प्रकट होते थे। कभी-कभी उनकी दोनों आँखें दुगुनी हो जाती थीं।
Although the Lord's complexion was golden, he sometimes appeared in different colors. Sometimes his eyes would double in size.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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