श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 175
 
 
श्लोक  2.8.175 
চরণ নাচায ক্ষণে, খল খল হাসে
জানু-গতি চলে ক্ষণে বালক-আবেশে
चरण नाचाय क्षणे, खल खल हासे
जानु-गति चले क्षणे बालक-आवेशे
 
 
अनुवाद
कभी वे अपने पैर हिलाते और खिलखिलाकर हँसते। कभी वे एक छोटे बच्चे की तरह घुटनों के बल रेंगते।
 
Sometimes he would move his legs and laugh heartily. Sometimes he would crawl on his knees like a small child.
तात्पर्य
घुटने के बल चलने को जानू-गति चलना कहते हैं। जानू-गति का अर्थ है घुटनों से गति या रेंगना।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)