श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 174
 
 
श्लोक  2.8.174 
ক্ষণে হয বাল্য-ভাবে পরম চঞ্চল
মুখে বাদ্য বায যেন ছাওযাল-সকল
क्षणे हय बाल्य-भावे परम चञ्चल
मुखे वाद्य बाय येन छाओयाल-सकल
 
 
अनुवाद
कभी-कभी वे बच्चों की तरह अत्यन्त बेचैन हो जाते थे और अपने मुख से विभिन्न बचकानी आवाजें निकालते थे।
 
Sometimes he would become extremely restless like a child and would make various childish sounds with his mouth.
तात्पर्य
कभी तो प्रभु अत्यंत चंचल बच्चे की तरह अपने मुख से अनेक प्रकार की ध्वनियाँ निकालते थे।

बाय (बाजाय का छोटा रूप) शब्द का अर्थ है '[वाद्य] बजाना'।

चाओयाल शब्द का अर्थ है 'बच्चा', 'लड़का' या 'अनुभवहीन'।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)