श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 170
 
 
श्लोक  2.8.170 
ভাবাবেশে পাকল লোচনে যারে চায
মহাত্রাস পাঞা সেই হাসিযা পলায
भावावेशे पाकल लोचने यारे चाय
महात्रास पाञा सेइ हासिया पलाय
 
 
अनुवाद
अपने परमानंद में भगवान जिस किसी को भी अपनी लाल आंखों से देखते, वह पहले तो भयभीत हो जाता और फिर हंसते हुए भाग जाता।
 
In his ecstasy, whoever the Lord looked at with his red eyes would first get frightened and then run away laughing.
तात्पर्य
पाकाला शब्द का अर्थ "रक्त लाल", "लाल", या "क्रिमसन" होता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)