श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 168
 
 
श्लोक  2.8.168 
কখনো বা করে কোটি-সিṁহের হুঙ্কার
কর্ণ-রক্ষা-হেতু সবে অনুগ্রহ তাঙ্র
कखनो वा करे कोटि-सिꣳहेर हुङ्कार
कर्ण-रक्षा-हेतु सबे अनुग्रह ताङ्र
 
 
अनुवाद
कभी-कभी उनकी दहाड़ लाखों सिंहों के समान होती थी, फिर भी उनकी दया से सभी के कान हानि से बच जाते थे।
 
Sometimes his roar was like that of millions of lions, yet through his mercy everyone's ears were saved from harm.
तात्पर्य
यद्यपि भगवान के द्वारा एक लाख शेरों की तरह गर्जना करने की ध्वनि, जीवधारियों के कानों के परदे भी फाड़ सकती थी, लेकिन दया करके उन्होंने उनके कमज़ोर कानों के परदों की रक्षा की।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)