श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 165
 
 
श्लोक  2.8.165 
মহানন্দে বিশ্বম্ভর গডাগডি যায
চারি-দিকে ভক্ত-গণ কৃষ্ণ-গুণ গায
महानन्दे विश्वम्भर गडागडि याय
चारि-दिके भक्त-गण कृष्ण-गुण गाय
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर आनंद में भूमि पर लोटने लगे, तथा सभी भक्तगण चारों ओर से कृष्ण की महिमा का गान करने लगे।
 
Visvambhara began to roll on the ground in joy, and all the devotees from all sides began to sing the glories of Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)