अद्वैत प्रभु ने गौरसुंदर को 'चोर' कहकर संबोधित करते हुए कहा, "अब हम आपके गौरव को समझ गए हैं।"'भारी-भुरी' पद का अर्थ "ऐश्वर्य", "गंभीरता", "आदर", "आत्म-सम्मान", "गौरव" या "अभिमान" है।