श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 164
 
 
श्लोक  2.8.164 
আচার্য গোসাঞি বলে,—“আরে আরে চোরা!
ভাঙ্গিল সকল তোর ভারি-ভুরি মোরা”
आचार्य गोसाञि बले,—“आरे आरे चोरा!
भाङ्गिल सकल तोर भारि-भुरि मोरा”
 
 
अनुवाद
आचार्य गोसानी ने कहा, “मेरे प्यारे चोर, हमने आपके गुप्त खजाने में सेंध लगाई है।
 
Acharya Gosani said, “My dear thief, we have broken into your secret treasure.
तात्पर्य
अद्वैत प्रभु ने गौरसुंदर को 'चोर' कहकर संबोधित करते हुए कहा, "अब हम आपके गौरव को समझ गए हैं।"

'भारी-भुरी' पद का अर्थ "ऐश्वर्य", "गंभीरता", "आदर", "आत्म-सम्मान", "गौरव" या "अभिमान" है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)