श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 162
 
 
श्लोक  2.8.162 
ক্ষণে নিত্যানন্দ-অঙ্গে পৃষ্ঠ দিযা বসে
চরণ তুলিযা সবাকারে চঃইঽ হাসে
क्षणे नित्यानन्द-अङ्गे पृष्ठ दिया वसे
चरण तुलिया सबाकारे चःइऽ हासे
 
 
अनुवाद
कभी वे नित्यानंद के सहारे बैठ जाते, कभी अपने पैर उठाकर सबकी ओर देखते और मुस्कुराते।
 
Sometimes he would sit with the support of Nityananda, sometimes he would raise his legs and look at everyone and smile.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)