श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 161
 
 
श्लोक  2.8.161 
ক্ষণে যায সবার চরণ ধরিবারে
পলায বৈষ্ণব-গণ চারি-দিকে ডরে
क्षणे याय सबार चरण धरिबारे
पलाय वैष्णव-गण चारि-दिके डरे
 
 
अनुवाद
कभी-कभी वे सबके पैर पकड़ने का प्रयास करते थे, और वैष्णव डर के मारे भाग जाते थे।
 
Sometimes he would try to seize everyone's feet, and the Vaishnavas would run away in fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)