श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 160
 
 
श्लोक  2.8.160 
ক্ষণে ক্ষণে অদ্ভুত বহযে মহাশ্বাস
সম্মুখ ছাডিযা সবে হয এক-পাশ
क्षणे क्षणे अद्भुत वहये महाश्वास
सम्मुख छाडिया सबे हय एक-पाश
 
 
अनुवाद
कभी-कभी प्रभु जोर से आह भरते थे, और हर कोई उनकी सांस के रास्ते से हट जाता था।
 
Sometimes the Lord sighed loudly, and everyone moved out of the way of His breath.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)