श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 156
 
 
श्लोक  2.8.156 
যখনে যা হয প্রভু আনন্দে মূর্ছিত
কর্ণ-মূলে সবে ঽহরিঽ বলে অতি ভীত
यखने या हय प्रभु आनन्दे मूर्छित
कर्ण-मूले सबे ऽहरिऽ बले अति भीत
 
 
अनुवाद
जब भी भगवान् परमानंद से अचेत होकर भूमि पर गिर पड़ते, तो भक्तगण भयभीत हो जाते और उनके कान में हरि नाम का जाप करने लगते।
 
Whenever the Lord fell unconscious on the ground due to ecstasy, the devotees would become frightened and start chanting the name of Hari in his ears.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)