श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  2.8.150 
দাস্য-ভাবে প্রভু নিজ-মহিমা না জানে
ঽজিনিলুঙ্ জিনিলুঙ্ঽ বলিঽ উঠে ঘনে ঘনে
दास्य-भावे प्रभु निज-महिमा ना जाने
ऽजिनिलुङ् जिनिलुङ्ऽ बलिऽ उठे घने घने
 
 
अनुवाद
प्रभु सेवक भाव में लीन होकर अपनी महिमा भूल गए। वे बार-बार चिल्लाते रहे, "मैंने विजय प्राप्त कर ली है! मैंने विजय प्राप्त कर ली है!"
 
The Lord, absorbed in his servant spirit, forgot his own glory. He kept shouting, "I have won! I have won!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)