| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 2: मध्य-खण्ड » अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन » श्लोक 15-16 |
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| | | | श्लोक 2.8.15-16  | মদিরা-যবনী যদি নিত্যানন্দ ধরে
জাতি-প্রাণ-ধন যদি মোর নাশ করে
তথাপি মোহার চিত্তে নহিব অন্যথা
সত্য সত্য তোমারে কহিলুঙ্ এই কথা” | मदिरा-यवनी यदि नित्यानन्द धरे
जाति-प्राण-धन यदि मोर नाश करे
तथापि मोहार चित्ते नहिब अन्यथा
सत्य सत्य तोमारे कहिलुङ् एइ कथा” | | | | | | अनुवाद | | "यदि नित्यानंद मदिरा का घड़ा भी धारण करे, स्त्रियों के साथ संगति करे, मेरी जाति, जीवन और धन को नष्ट करे, तो भी मेरा विश्वास नहीं डगमगाएगा। यह मैं आपसे सत्य कह रहा हूँ।" | | | | "Even if Nityananda were to carry a pot of wine, associate with women, destroy my caste, life and wealth, my faith would not waver. I am telling you this truth." | |
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