श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 147
 
 
श्लोक  2.8.147 
যখন কান্দযে প্রভু, প্রহরেক কান্দে
লোটায ভূমিতে কেশ, তাহা নাহি বান্ধে
यखन कान्दये प्रभु, प्रहरेक कान्दे
लोटाय भूमिते केश, ताहा नाहि बान्धे
 
 
अनुवाद
जब भी प्रभु रोते, तो तीन घंटे तक रोते रहते। उनके बाल बिखरकर ज़मीन पर बिखर जाते थे।
 
Whenever the Lord cried, he would cry for up to three hours. His hair would fall to the ground in disarray.
तात्पर्य
भगवान के बाल खुल गए। तीन घंटे तक रोते रहने के बाद भी उन्हें अपने खुले बाल बांधने का अवसर नहीं मिला।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)