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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन
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श्लोक 146
श्लोक
2.8.146
চৌদিকে গোবিন্দ-ধ্বনি,
শচীর নন্দন নাচে রঙ্গে
বিহ্বল হৈলা সব পারিষদ সঙ্গে
चौदिके गोविन्द-ध्वनि,
शचीर नन्दन नाचे रङ्गे
विह्वल हैला सब पारिषद सङ्गे
अनुवाद
जब शचीपुत्र अपने साथियों के साथ आनंद में नृत्य कर रहे थे, तब गोविन्द का नाम सभी दिशाओं में गूंज उठा।
While Sachiputra was dancing in joy with his companions, the name of Govinda resounded in all directions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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