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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन
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श्लोक 135
श्लोक
2.8.135
কখন ঈশ্বর-ভাবে প্রভুর প্রকাশ
কখন রোদন করে, বলে, ঽমুঞি দাসঽ
कखन ईश्वर-भावे प्रभुर प्रकाश
कखन रोदन करे, बले, ऽमुञि दासऽ
अनुवाद
कभी-कभी भगवान ने सर्वोच्च नियन्ता के रूप में अपनी मनोदशा प्रकट की, और कभी-कभी उन्होंने पुकारते हुए कहा, "मैं सेवक हूँ।"
Sometimes the Lord revealed His state of mind as the Supreme Controller, and sometimes He cried out, “I am the servant.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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