श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 128-129
 
 
श्लोक  2.8.128-129 
“কৃপা করিঽ কৃষ্ণ, মোরে দেহঽ এই বর
যে সমযে আছাড খাযেন বিশ্বম্ভর
মুঞি যেন তাহা নাহি জানোঙ্ সে সময
হেন কৃপা কর মোরে কৃষ্ণ মহাশয
“कृपा करिऽ कृष्ण, मोरे देहऽ एइ वर
ये समये आछाड खायेन विश्वम्भर
मुञि येन ताहा नाहि जानोङ् से समय
हेन कृपा कर मोरे कृष्ण महाशय
 
 
अनुवाद
"हे कृष्ण, कृपया मुझे यह वरदान दीजिए। जब ​​विश्वम्भर बलपूर्वक भूमि पर गिरें, तो मुझे इसका कुछ भी पता न चले। हे कृष्ण, कृपया मुझ पर यह कृपा कीजिए। हे कृष्ण! मुझे यह वरदान दीजिए।"
 
"O Krishna, please grant me this boon. When Vishvambhara falls forcefully to the ground, I should not know anything about it. O Krishna, please bestow this favor upon me. O Krishna! Grant me this boon."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)