श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  2.8.120 
এ-গুলা সকলে মধুমতী-সিদ্ধি জানে
রাত্রি করিঽ মন্ত্র জপিঽ পঞ্চ কন্যা আনে
ए-गुला सकले मधुमती-सिद्धि जाने
रात्रि करिऽ मन्त्र जपिऽ पञ्च कन्या आने
 
 
अनुवाद
"ये लोग मधुमती की रहस्यमय सिद्धि को जानते हैं। वे रात में पाँच कुमारियों को बुलाने के लिए मंत्र पढ़ते हैं।"
 
"These people know the mysterious power of Madhumati. They chant mantras at night to summon the five maidens."
तात्पर्य
"भक्तों को मधुमति के रूप में सिद्धि की प्राप्ति होती है, और मंत्रों के प्रभाव से, वे पाँच प्रकार की अविवाहित लड़कियों को बुलाते हैं और उनके साथ गैरकानूनी संबंध रखते हैं।" मध्यकाल विभिन्न घृणित गतिविधियों जैसे पंच-मकार [पंच-मकार माँस, मद्य, मत्स्य, महिला और मैथुन को संदर्भित करता है।] और वीराचार [लिंग पर आधारित तांत्रिक अभ्यास।], द्वारा प्रदूषित था। जो लोग भक्ति सेवा से ईर्ष्या करते थे, वे भक्तों पर इस तरह की घृणित गतिविधियों को बताने में संकोच नहीं करते थे, जो बिना प्रेरणा के कीर्तन में लगे हुए थे।

मधुमति-सिद्धि एक विशेष स्वर्गीय कन्या मधुमति का आह्वान करके प्राप्त की जाती है। इसे कृकालास-दीपिका में इस प्रकार वर्णित किया गया है: "मधुमति एक विशेष स्वर्गीय कन्या है। एक साधक उसे मंत्रों के माध्यम से नियंत्रित कर सकता है। इस कला में पूर्णता प्राप्त करके, सैकड़ों स्वर्गीय लड़कियाँ एक के नियंत्रण में आती हैं। जब भी साधक स्वर्ग, पाताल या पृथ्वी पर कहीं भी जाना चाहता है, तो वे लड़कियाँ तुरंत उसे वहाँ ले जाती हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)