श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  2.8.111 
শ্রীবাস-মন্দিরে প্রতি নিশায কীর্তন
কোন-দিন হয চন্দ্রশেখর ভবন
श्रीवास-मन्दिरे प्रति निशाय कीर्तन
कोन-दिन हय चन्द्रशेखर भवन
 
 
अनुवाद
प्रत्येक रात्रि कीर्तन श्रीवास के घर पर होता था, कुछ रात्रियों को छोड़कर चन्द्रशेखर के घर पर भी होता था।
 
Every night the kirtan was held at Srivas's house, except on a few nights it was also held at Chandrashekhar's house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)