श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  2.8.110 
সর্ব-বৈষ্ণবের হৈল শুনিযা উল্লাস
আরম্ভিলা মহাপ্রভু কীর্তন-বিলাস
सर्व-वैष्णवेर हैल शुनिया उल्लास
आरम्भिला महाप्रभु कीर्तन-विलास
 
 
अनुवाद
यह सुनकर सभी वैष्णव आनंदित हो गए। इस प्रकार महाप्रभु ने अपनी कीर्तन लीला आरंभ की।
 
Hearing this, all the Vaishnavas were delighted. Thus, Mahaprabhu began his kirtan pastimes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)