श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.8.11 
কোন্ জাতি, কোন্ কুল, কিছুই না জানি
পরম উদার তুমি,—বলিলাম আমি
कोन् जाति, कोन् कुल, किछुइ ना जानि
परम उदार तुमि,—बलिलाम आमि
 
 
अनुवाद
“मैं जानता हूँ कि आप बहुत उदार हैं, लेकिन हम नहीं जानते कि वह किस जाति और किस परिवार से हैं।
 
“I know you are very generous, but we don’t know what caste or family he belongs to.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)