श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  2.8.104 
কৃতার্থ হৈযা সেই পুরুষ চলিল
ঽহরি-ধ্বনিঽ সর্ব-গণে মঙ্গল উঠিল
कृतार्थ हैया सेइ पुरुष चलिल
ऽहरि-ध्वनिऽ सर्व-गणे मङ्गल उठिल
 
 
अनुवाद
गायक पूरी तरह संतुष्ट होकर चला गया। सभी भक्तों ने हरि नाम का जाप किया।
 
The singer left completely satisfied. All the devotees chanted the name of Hari.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)