श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  2.8.101 
সে মহাপুরুষ যত শিব-গীত গাইল
পরিপূর্ণ ফল তার একত্র পাইল
से महापुरुष यत शिव-गीत गाइल
परिपूर्ण फल तार एकत्र पाइल
 
 
अनुवाद
उस महान् पुरुष ने शिव की जो भी स्तुति गायी थी, अब उसका पूर्ण फल प्राप्त हुआ।
 
Whatever praises that great man had sung of Shiva, now he got its full fruits.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)