यदि भौतिकवादी वैष्णवों की गतिविधियों और व्यवहार को नहीं समझ सकते हैं, तो वे हर पल गलतियाँ करेंगे और वैष्णवों के खिलाफ अपराधों के ढेर लगा देंगे। लेकिन यदि वे पर्याप्त रूप से धार्मिक हैं, तो वे वैष्णव-अपराध नहीं करेंगे और इस तरह गुमराह नहीं होंगे। कोई भी युक्त-वैराग्य या उचित वैराग्य के परिणाम को फलु-वैराग्य या झूठे वैराग्य के माध्यम से प्राप्त नहीं कर सकता है; बल्कि, कोई उचित दृष्टि की कमी के परिणामस्वरूप होने वाले अपराधों को ही जमा करता है। चूँकि श्री चैतन्य के आश्रय में भक्त युक्त-वैराग्य और फलु-वैराग्य के बीच के अंतर को समझते हैं, इसलिए वे इस दुनिया के सामान्य, मूर्ख, लालची लोगों से सभी मामलों में श्रेष्ठ हैं। केवल वे ही पूरी दुनिया के आध्यात्मिक गुरु के रूप में कार्य करने में सक्षम हैं। भौतिक दृष्टि वाले व्यक्ति जो श्री चैतन्यदेव के अधीन नहीं हैं, वे अपनी मूर्खता की महिमा करते हैं।
