श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  2.7.96 
মুকুন্দেরে পরম সন্তোষে করি’ কোলে’
সিঞ্চিলেন অঙ্গ তাঙ্র প্রেমানন্দ-জলে
मुकुन्देरे परम सन्तोषे करि’ कोले’
सिञ्चिलेन अङ्ग ताङ्र प्रेमानन्द-जले
 
 
अनुवाद
गदाधर पंडित ने बड़ी संतुष्टि के साथ मुकुंद को गले लगाया और उन्हें प्रेम के आंसुओं से नहला दिया।
 
Gadadhara Pandit embraced Mukunda with great satisfaction and bathed him with tears of love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)