श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  2.7.92 
এই-মত কত-ক্ষণ প্রেম প্রকাশিযা
আনন্দে মূর্ছিত হৈ’ থাকিলা পডিযা
एइ-मत कत-क्षण प्रेम प्रकाशिया
आनन्दे मूर्छित है’ थाकिला पडिया
 
 
अनुवाद
इस प्रकार कुछ देर तक अपने प्रेमोन्मत्त भाव को प्रकट करने के पश्चात् वह वहीं पर अचेत होकर पड़ा रहा।
 
In this way, after expressing his love-crazy feelings for some time, he remained lying there unconscious.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)