वैदिक साहित्य में परम भगवान को अक्सर पुंडरीकाक्ष के रूप में संबोधित किया जाता है। इसलिए पुंडरीक विद्यानिधि उस भगवान के समर्पित भक्त के रूप में प्रसिद्ध थे।
छान्दोग्य उपनिषद (1.6.7) में कहा गया है: तस्य यथा कपयासं पुंडरीकमेवम अक्षिणी तस्योदिति नाम स एष सर्वेभ्यः पाप्मभ्य उदिता उदेति ह वै सर्वेभ्यः पाप्मभ्यो य एवम वेद-"उस व्यक्तित्व की आँखें कमल की तरह सुंदर हैं। वह पापपूर्ण प्रतिक्रियाओं से अछूता है, और जो कोई भी उस व्यक्तित्व की पूजा करता है वह भी पापपूर्ण प्रतिक्रियाओं से अछूता हो जाता है।"
गौड़-देश के पूर्वी क्षितिज पर स्थित चटगाँव प्रांत की पवित्रता को बढ़ाने के लिए, भगवान ने अपने प्रिय भक्त पुंडरीक विद्यानिधि को वहाँ प्रकट कराया। विद्यानिधि के प्रकट होने के स्थान को मेखला-ग्राम के रूप में जाना जाता है, जो चटगाँव जिले के हाटा-हजारि पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है।
