श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  2.7.89 
হেন সে হৈল কম্প ভাবের বিকারে
দশ জনে ধরিলে ও ধরিতে না পারে
हेन से हैल कम्प भावेर विकारे
दश जने धरिले ओ धरिते ना पारे
 
 
अनुवाद
वह प्रेम के उन्माद में इतनी जोर से कांप रहा था कि दस आदमी भी उसे थामे नहीं रह सके।
 
He was shaking so hard in the frenzy of love that even ten men could not hold him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)