श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  2.7.87 
অনুতাপ করিযা কান্দযে উচ্চৈঃস্বরে
“মুই সে বঞ্চিত হৈলুঙ্ হেন অবতারে”
अनुताप करिया कान्दये उच्चैःस्वरे
“मुइ से वञ्चित हैलुङ् हेन अवतारे”
 
 
अनुवाद
वह विलाप करते हुए जोर से चिल्लाया, “आपके वर्तमान अवतार में मुझे धोखा दिया गया है।”
 
He cried out loudly, lamenting, “I have been deceived by your present incarnation.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)