श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  2.7.86 
“কৃষ্ণ রে ঠাকুর মোর, কৃষ্ণ মোর প্রাণ
মোরে সে করিলে কাষ্ঠ-পাষাণ-সমান”
“कृष्ण रे ठाकुर मोर, कृष्ण मोर प्राण
मोरे से करिले काष्ठ-पाषाण-समान”
 
 
अनुवाद
"हे कृष्ण, हे मेरे प्रभु! हे कृष्ण, हे मेरे जीवन और आत्मा! आपने मेरे हृदय को लकड़ी या पत्थर की तरह कठोर बना दिया है।"
 
"O Krishna, O my Lord! O Krishna, O my life and soul! You have made my heart as hard as wood or stone."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)