श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  2.7.85 
কোথা গেল সে বা দিব্য-কেশের সṁস্কার
ধূলায লোটাযে করে ক্রন্দন অপার
कोथा गेल से वा दिव्य-केशेर सꣳस्कार
धूलाय लोटाये करे क्रन्दन अपार
 
 
अनुवाद
जब वह जमीन पर लोट-पोट होकर खूब रो रहा था तो उसके भव्य स्टाइल वाले बालों का क्या हुआ?
 
What happened to his gorgeously styled hair while he was rolling on the ground crying profusely?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)