श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  2.7.84 
কোথায পডিল গিযাশয্যা পদাঘাতে
প্রেমাবেশে দিব্য-বস্ত্র চিরে দুই হাতে
कोथाय पडिल गियाशय्या पदाघाते
प्रेमावेशे दिव्य-वस्त्र चिरे दुइ हाते
 
 
अनुवाद
उसके पैरों की ठोकर से बिस्तर कहाँ गिर गया? प्रेम के आवेश में उसने अपने दोनों हाथों से अपने आलीशान वस्त्र फाड़ डाले।
 
Where did the bed fall when her feet struck it? In a fit of love, she tore her luxurious robes with both her hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)