श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  2.7.83 
কোথা গেল দিব্য বাটা, দিব্য গুযা পান
কোথা গেল ঝারি, যাতে করে জল-পান
कोथा गेल दिव्य बाटा, दिव्य गुया पान
कोथा गेल झारि, याते करे जल-पान
 
 
अनुवाद
उस आलीशान तवे और अच्छी तरह से तैयार किए गए तवे का क्या हुआ? पीने के पानी के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी के बर्तनों का क्या हुआ?
 
What happened to that luxurious skillet and the well-crafted pan? What happened to the water pots used for drinking water?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)