श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.7.82 
লাথি-আছাডের ঘাযে যতেক সম্ভার
ভাঙ্গিল সকল, রক্ষা নাহি কারো আর
लाथि-आछाडेर घाये यतेक सम्भार
भाङ्गिल सकल, रक्षा नाहि कारो आर
 
 
अनुवाद
उसने पैरों से लात मारकर आस-पास का सारा सामान तोड़ डाला। कुछ भी नहीं बचा।
 
He kicked and smashed everything around him. Nothing was left.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)