श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  2.7.81 
“বোল বোল’ বলি’ মহা লাগিলা গর্জিতে
স্থির হৈতে না পারিলা, পডিলা ভুমিতে
“बोल बोल’ बलि’ महा लागिला गर्जिते
स्थिर हैते ना पारिला, पडिला भुमिते
 
 
अनुवाद
वह ज़ोर से दहाड़ते हुए बोला, "पढ़ता रह! पढ़ता रह!" वह स्थिर नहीं रह सका और ज़मीन पर गिर पड़ा।
 
He roared loudly, "Keep reading! Keep reading!" He could not stand still and fell to the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)