| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 2: मध्य-खण्ड » अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन » श्लोक 78-80 |
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| | | | श्लोक 2.7.78-80  | শুনিলেন মাত্র ভক্তি-যোগের বর্ণন
বিদ্যানিধি লাগিলেন করিতে ক্রন্দন
নযনে অপূর্ব বহে শ্রী-আনন্দ-ধার
যেন গঙ্গা-দেবীর হৈল অবতার
অশ্রু, কম্প, স্বেদ, মূর্ছা, পুলক, হুঙ্কার
এক-কালে হৈল সবার অবতার | शुनिलेन मात्र भक्ति-योगेर वर्णन
विद्यानिधि लागिलेन करिते क्रन्दन
नयने अपूर्व वहे श्री-आनन्द-धार
येन गङ्गा-देवीर हैल अवतार
अश्रु, कम्प, स्वेद, मूर्छा, पुलक, हुङ्कार
एक-काले हैल सबार अवतार | | | | | | अनुवाद | | भक्ति का यह वर्णन सुनते ही विद्यानिधि रो पड़े। उनकी आँखों से अश्रुधारा ऐसी प्रवाहित हुई मानो वे साक्षात् गंगादेवी के अवतार हों। उनके शरीर में प्रेमोन्माद के सभी लक्षण, जैसे आँसू, कंपकंपी, पसीना आना, मूर्च्छा, रोंगटे खड़े हो जाना और ज़ोर से चिल्लाना, एक साथ प्रकट हो गए। | | | | Upon hearing this description of devotion, Vidyanidhi burst into tears. Tears flowed from his eyes as if he were the incarnation of Goddess Ganga. All the symptoms of love-madness, such as tears, trembling, sweating, fainting, goosebumps, and loud screams, appeared in his body simultaneously. | |
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