vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन
»
श्लोक 71
श्लोक
2.7.71
বুঝি’ গদাধর-চিত্ত শ্রী-মুকুন্দানন্দ
বিদ্যানিধি-প্রকাশিতে করিলা আরম্ভ
बुझि’ गदाधर-चित्त श्री-मुकुन्दानन्द
विद्यानिधि-प्रकाशिते करिला आरम्भ
अनुवाद
गदाधर के हृदय की बात समझकर श्री मुकुन्द प्रसन्नतापूर्वक विद्यानिधि की महिमा बताने लगे।
Understanding the thoughts of Gadhdhar's heart, Shri Mukunda happily started telling the glory of Vidyanidhi.
तात्पर्य
गदाधर की चित्त विचलन देखकर मुकुंद ने विद्यानिधि को उनके प्रति यथेष्ट रूप से प्रकट करना आरंभ किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×