श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  2.7.71 
বুঝি’ গদাধর-চিত্ত শ্রী-মুকুন্দানন্দ
বিদ্যানিধি-প্রকাশিতে করিলা আরম্ভ
बुझि’ गदाधर-चित्त श्री-मुकुन्दानन्द
विद्यानिधि-प्रकाशिते करिला आरम्भ
 
 
अनुवाद
गदाधर के हृदय की बात समझकर श्री मुकुन्द प्रसन्नतापूर्वक विद्यानिधि की महिमा बताने लगे।
 
Understanding the thoughts of Gadhdhar's heart, Shri Mukunda happily started telling the glory of Vidyanidhi.
तात्पर्य
गदाधर की चित्त विचलन देखकर मुकुंद ने विद्यानिधि को उनके प्रति यथेष्ट रूप से प्रकट करना आरंभ किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)