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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन
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श्लोक 68
श्लोक
2.7.68
আজন্ম-বিরক্ত গদাধর মহাশয
বিদ্যানিধি-প্রতি কিছু জন্মিল সṁশয
आजन्म-विरक्त गदाधर महाशय
विद्यानिधि-प्रति किछु जन्मिल सꣳशय
अनुवाद
गदाधर महाशय जन्म से ही संन्यासी थे, इसलिए उनके मन में विद्यानिधि के बारे में कुछ संदेह उत्पन्न हो गया।
Gadadhara Mahashaya was a Sanyasi by birth, hence some doubts arose in his mind about Vidyanidhi.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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