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श्लोक 2.7.68  |
আজন্ম-বিরক্ত গদাধর মহাশয
বিদ্যানিধি-প্রতি কিছু জন্মিল সṁশয |
आजन्म-विरक्त गदाधर महाशय
विद्यानिधि-प्रति किछु जन्मिल सꣳशय |
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| अनुवाद |
| गदाधर महाशय जन्म से ही संन्यासी थे, इसलिए उनके मन में विद्यानिधि के बारे में कुछ संदेह उत्पन्न हो गया। |
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| Gadadhara Mahashaya was a Sanyasi by birth, hence some doubts arose in his mind about Vidyanidhi. |
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