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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन
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श्लोक 64
श्लोक
2.7.64
কি কহিব সে বা কেশভারের সṁস্কার
দিব্য-গন্ধ আমলকি বহি নাহি আর
कि कहिब से वा केशभारेर सꣳस्कार
दिव्य-गन्ध आमलकि बहि नाहि आर
अनुवाद
मैं उनके बालों की अद्भुत शैली के बारे में क्या कह सकता हूँ, जो सुगंधित आमलकी तेल से अभिसिंचित थे?
What can I say about the wonderful style of his hair, which was anointed with fragrant amalaki oil?
तात्पर्य
दिव्य-गंधा आंवला से अभिप्राय उस हर्बल तेल से है जिसे बालों पर लगाया जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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