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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन
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श्लोक 63
श्लोक
2.7.63
চন্দনের ঊধ্ব-পুণ্ড্র-তিলক কপালে
গন্ধের সহিত তথি ফাগু-বিন্দু মিলে
चन्दनेर ऊध्व-पुण्ड्र-तिलक कपाले
गन्धेर सहित तथि फागु-बिन्दु मिले
अनुवाद
उनके माथे पर चंदन का तिलक तथा सिंदूर मिश्रित चंदन की बिंदियां लगी हुई थीं।
There was a sandalwood tilak and sandalwood dots mixed with vermillion on his forehead.
तात्पर्य
वाक्यांश फागु-बिन्दु का उल्लेख सिंदूर के लाल बिंदुओं से है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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